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डोटासरा ने पुस्तके हटाने के फैसले को ग़लत बताया

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कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा हे की

भारत के निर्माण में महानायकों का योगदान बताने वाली कक्षा 12वीं की किताबों पर शिक्षा मंत्री द्वारा अनावश्यक विवाद खड़ा करके उन्हें पाठ्यक्रम से हटाने की बयानबाजी करना संघ  की संकुचित सोच व शिक्षा व्यवस्था पर वैचारिक प्रहार है।

उन्होंने कहा की कक्षा 12वीं की ये किताबें भाजपा सरकार की अनुमति के बाद छापी गई हैं, स्वयं शिक्षा मंत्री और अफसरों ने किताबें छापने की स्वीकृति दी है। 4 लाख 90 हजार किताबें छप चुकी हैं और 80% किताबें विद्यार्थियों को बांटी जा चुकी हैं।

ऐसे में सवाल ये कि अब इन किताबों को पाठ्यक्रम से हटाने का क्या औचित्य है?
मंत्री को इन किताबों में अब कौनसी खामी नज़र आ रही है, जो उन्हें पहले नहीं दिखाई दी?
मंत्री और सरकार के जिम्मेवार अफसरों ने स्वीकृति देने से पहले क्या जांच पड़ताल की?
अगर मंत्री बिना बोध के किसी विषय की स्वीकृति दे रहे हैं तो फिर किस बात के मंत्री हैं, क्यों सरकार के करोड़ों रुपए बर्बाद करके शिक्षा व्यवस्था का बेड़ागर्क करने में लगे हैं?

डोटासरा ने कहा किताबों से पूर्व प्रधानमंत्रियों के योगदान को मिटाना केवल पाठ्यक्रम में बदलाव नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में विचार निर्माण की दिशा को बदलने का प्रयास है। असल में मंत्री का उद्देश्य सिर्फ संघ की विचारधारा एवं भाजपा की राजनीतिक सोच को किताबों के जरिए विद्यार्थियों पर थोपना है।

राज्य की भाजपा सरकार षड्यंत्रपूर्वक इतिहास को तोड़-मरोड़कर एक पक्षीय शिक्षा से संघ  की नफ़रती सोच को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाना चाहती है। अगर ऐसा हुआ तो यह न सिर्फ विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण के लिए चिंताजनक संकेत है, बल्कि उनमें संकीर्ण व विघटनकारी सोच का कारक भी बन सकती है।

उन्होंने कहा बतौर शिक्षा मंत्री मेरे कार्यकाल में पाठ्यक्रम में 4 किताबें सम्मिलित की गई, जिनमें आज़ादी के बाद पूर्व प्रधानमंत्रियों व युगपुरुषों का अमिट योगदान हैं। वो योगदान जो उन्होंने आधुनिक भारत की नींव रखने से लेकर सशक्त भारत के निर्माण तक देश को सींचने और दुनिया में शक्ति का केंद्र स्थापित करने में दिया।

डोटासरा ने सवाल उठाया की क्या भाजपा सरकार दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की नींव रखने वाले हिंद के जवाहर की विरासत को मिटाना चाहती है? भारत को शून्य से शिखर तक पहुंचाने वाले प्रथम प्रधानमंत्री पंडित नेहरू जी के दूरदर्शी नेतृत्व से बने आईआईटी, आईआईएम, इसरो, योजना आयोग, एम्स और शिक्षा व सामाजिक न्याय के योगदान को मिटाना चाहती है?

क्या भाजपा सरकार देश की एकता और अखंडता के लिए बलिदान देने वाली आयरन लेडी स्व. इंदिरा गांधी जी के मजबूत इरादों से पाकिस्तान के दो टुकड़े, पोखरण में परमाणु परीक्षण, बैंकों के राष्ट्रीयकरण जैसे ऐतिहासिक निर्णयों को छिपाना चाहती है?

या फिर ये सरकार आधुनिक भारत के निर्माता और देश को कंप्यूटर-युग में प्रवेश कराने वाले पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी जी की कंप्यूटर व दूरसंचार क्रांति एवं पंचायतीराज को सुदृढ़ करने जैसे अनेक ऐतिहासिक फैसले को मिटाना चाहती है?

क्या भाजपा को देश में उदारीकरण व आर्थिक सुधारों के प्रणेता पूर्व प्रधानमंत्री स्व. मनमोहन सिंह जी का योगदान कम दिखता है? जिनके कुशल नेतृत्व में भारत की जनता को मनरेगा, भोजन का अधिकार, सूचना का अधिकार, शिक्षा का अधिकार जैसी कल्याणकारी नीतियां व अधिकार मिले।

क्या भाजपा सरकार देश के महानायकों का ये अमिट योगदान पाठ्यक्रम से हटाकर छात्रों से इतिहास और सच्चाई छिपाना चाहती है?

Waqt 24
Author: Waqt 24

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