प्रवर्तन निदेशालय यानी, ED ने आज यानी, बुधवार 24 जुलाई को अनिल अंबानी के रिलायंस ग्रुप से जुड़े 35 से ज्यादा ठिकानों और 50 कंपनियों पर छापेमारी की। ये छापे यस बैंक लोन धोखाधड़ी मामले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के तहत मारे गए हैं।
ये कार्रवाई सीबीआई की ओर से दर्ज दो एफआईआर और सेबी, नेशनल हाउसिंग बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा और नेशनल फाइनेंशियल रिपोर्टिंग अथॉरिटी (एनएफआरए) जैसी एजेंसियों से मिली जानकारी के आधार पर की गई है।
ED के मुताबिक, शुरुआती जांच से पता चला है कि 2017 से 2019 के बीच यस बैंक द्वारा दी गई करीब 3,000 करोड़ रुपए की लोन राशि को कथित तौर पर फर्जी कंपनियों और अन्य ग्रुप कंपनियों में ट्रांसफर किया गया। जांचकर्ताओं को ये भी सबूत मिले हैं कि यस बैंक के अधिकारियों को शायद रिश्वत दी गई।
कुछ दिन पहले स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने अनिल अंबानी की ग्रुप कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस और खुद अनिल अंबानी को “फ्रॉड” घोषित किया था। SBI ने 23 जून 2025 को RCom के लोन अकाउंट को फ्रॉड कैटेगरी में डाला और 24 जून 2025 को इसकी जानकारी रिजर्व बैंक (RBI) को दी।
SBI का कहना है कि RCom ने बैंक से लिए गए 31,580 करोड़ रुपए के लोन का गलत इस्तेमाल किया। इसमें से करीब 13,667 करोड़ रुपए दूसरी कंपनियों के लोन चुकाने में खर्च किए। 12,692 करोड़ रुपए रिलायंस ग्रुप की दूसरी कंपनियों को ट्रांसफर किए। यह नियमों के खिलाफ था।
SBI ने ये भी कहा कि हम इस मामले में सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) के पास शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया में है। इसके अलावा, अनिल अंबानी के खिलाफ पर्सनल इन्सॉल्वेंसी (दिवालियापन) की कार्रवाई भी नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) मुंबई में चल रही है


