best news portal development company in india

धर्म और सुख किसी दुकान पर नहीं मिलता: आचार्य श्री वर्धमान सागर

SHARE:

टोंक ।
वर्तमान भौतिक युग में व्यसन, फैशन, दूषित खानपान ,रहन-सहन ,वेशभूषा का देव शास्त्र और गुरु के समक्ष ध्यान रखना जरुरी है। प्रतिदिन देव दर्शन करना, पानी छानकर पीना और रात्रि भोजन नहीं करना यह जैन धर्म के प्रमुख सिद्धांत हैं ।भगवान की वाणी का उल्लंघन करने से पुण्य नहीं मिलता है ,आप दुखी रहते हैं । जीवन की सार्थकता तभी होगी जब आपका खानपान रहन-सहन ,वेशभूषा और भगवान के प्रति विनय होना चाहिए सम्मान धर्म धारण करने से मिलता हैं ,धर्म आपको सम्मानित कराता है। तीर्थ स्वयं बनते हैं बनाएं नहीं जाते हैं। यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने टोंक नगर में आयोजित धर्म सभा में महती उपस्थिति में प्रकट की। राजेश पंचोलिया अनुसार आचार्य श्री ने एक श्लोक की विवेचना कर बताया कि प्रतिदिन आप कैसे चलते हैं ,कैसी चेष्टा करते हैं ,कैसे बैठते हैं ,कैसे सोते हैं ,कैसे बोलते हैं जिससे इन कार्यों से आपका पाप का बंध आश्रव नहीं हो इसका कभी किसी ने चिंतन नहीं किया ।बहुत ही कठिनाई से अर्जित पुण्य से तीर्थंकरो का जैन मनुष्य भव मिला है जिसमें तीर्थंकरों द्वारा प्रतिपादित धर्म की वाणी गुरुजनों से सुनने को मिल रही है। शास्त्रों की वाणी मानने वाले परम भक्त होते हैं आपके द्वारा किए जाने वाले कार्यों से पुण्य और पाप मिलता हैं धर्म और सुख किसी दुकान पर नहीं मिलता हैं ।आचार्य श्री के प्रवचन के पूर्व मुनि श्री प्रभव सागर जी ने प्रवचन में बताया कि भगवान के दर्शन अभिषेक पूजन जैसे द्रव्यों और जिस भाव से करते है उस अनुसार फल पुण्य या पाप सुख या दुःख अर्जित होता हैं। धर्म सभा में श्रीजी एवं आचार्य के चित्रों का अनावरण और दीप प्रवज्जलन का सौभाग्य को मिला आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के चरण प्रक्षालन कर जिनवाणी भेट और पूजन का सौभाग्य अनेक भक्तों को प्राप्त हुआ ।आचार्य श्री जब से संघ सहित विराजित हैं प्रतिदिन राजस्थान की अनेक जिलों बूंदी भीलवाड़ा ,कोटा ,और अन्य राज्यो से सैकड़ों की संख्या में भक्त पधारकर धर्म लाभ ले रहे हैं। शाम को सभी पुरुष महिलाओं,युवा ,युवतियों और विभिन्न धार्मिक संगठनों को मुनि श्री हितेंद्र सागर ने उपयोगी मार्गदर्शन दिया।आचार्य संघ के आगमन से नगर धर्ममय हो गया हैं ।

Screenshot
Waqt 24
Author: Waqt 24

Leave a Comment