सावन में व्रत सिर्फ खाने से नहीं, बल्कि विचारों से भी करना चाहिए। इन दिनों में नकारात्मक विचारों से दूरी बनाकर मन को शांत रखें। ध्यान करें। ऐसा करने से सकारात्मकता बढ़ेगी और विचार पवित्र होंगे।
अभी बारिश का समय है, कभी-कभी पूरे दिन धूप नहीं निकलती है, मौसम में नमी रहती है, ऐसे में हमारा पाचन अव्यवस्थित हो जाता है। इसलिए इन दिनों में सात्त्विक भोजन करना चाहिए। सावन में तामसिक भोजन जैसे प्याज, लहसुन, तले-भुने और मांसाहारी खाने का त्याग करें। इनकी जगह फल, नारियल, गाय का दूध और गाय के दूध से बने घी से बनी चीजें, घर के संतुलित खाने को प्राथमिकता दें। ये भोजन आसानी से पचता है।
ये समय भावनाओं की शुद्धि का भी है। शिवलिंग पर जल चढ़ाने की परंपरा है। शिवलिंग पर जल चढ़ाकर क्रोध, लालच, ईर्ष्या जैसे बुरे विचारों को छोड़ने का संकल्प लेना चाहिए।इन दिनों में पूजा-पाठ के साथ ही मंत्र जप और ध्यान करने का विशेष महत्व है। पूजा-पाठ के लिए समय न हो तब भी कम से कम मंत्र जप तो जरूर करना चाहिए। ऊँ नमः शिवाय मंत्र का जप कभी भी कर सकते हैं। सुबह टहलते-टहलते भी मंत्र जप कर सकते हैं।
पूजा-पाठ और मंत्र जप के साथ ही कुछ देर शिव के नाम या शिव मंत्र लिखने का शुभ काम भी कर सकते हैं। मंत्र लिखते समय भगवान का ध्यान करें और बुरे विचारों को छोड़ने का संकल्प लें, ऐसा करने से मन शांत होता है और एकाग्रता बढ़ती है।

