10 जुलाई, 2025 को उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ दिल्ली में जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी में स्पीच दे रहे थे। बोले मैं सही समय पर रिटायर होऊंगा। और वह समय है अगस्त 2027, अगर कोई दिव्य शक्ति आ जाए तो बात अलग है।
जगदीप धनखड़ ही जानते हैं कि वे किस दिव्य शक्ति की बात कर रहे थे, लेकिन 21 जुलाई को उन्होंने इस्तीफा दे दिया। वजह खराब सेहत बताई।
जगदीप धनखड़ 21 जुलाई की शाम 6 बजे राज्यसभा में थे। उनके हाव-भाव आम दिनों की तरह ही लग रहे थे। उनके एक करीबी ने ये भी बताया कि उनका अगले हफ्ते का शेड्यूल भी तैयार था। रात करीब 9 बजे के जगदीप धनखड़ ने अचानक इस्तीफा दे दिया। इन तीन घंटों में क्या बदला, कोई नहीं जानता।
सोर्स बताते हैं, ‘पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप सिंह धनखड़ के घर 20 जुलाई को एक पार्टी हुई थी। इसी दिन जगदीप धनखड़ की पत्नी सुदेश धनखड़ का जन्मदिन था। इस पार्टी में सभी पार्टियों के नेता, राज्यसभा के स्टाफ के साथ राज्यसभा टीवी के स्टाफ को भी बुलाया गया था। ये पार्टी धनखड़ के इस्तीफे से एक दिन पहले हुई थी।’
माना गया कि उन्होंने खुद को फेयरवेल पार्टी दी थी। सोर्स ने ये भी बताया कि उनकी विदाई तय थी, लेकिन इतनी जल्दी होगी, इसका अंदाजा नहीं था।
जगदीप धनखड़ ने पहली बार सार्वजनिक तौर पर मुंबई में केंद्रीय कपास प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान में लाइन क्रॉस की। तारीख 3 दिसंबर 2024 थी। इस दिन संस्थान का शताब्दी समारोह था। धनखड़ ने किसानों से किए गए वादों को लेकर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को कठघरे में खड़ा किया था।
धनखड़ ने मंच से शिवराज सिंह चौहान की ओर इशारा करते हुए कहा, ‘कृषि मंत्री जी, आपका एक-एक पल भारी है। मेरा आपसे आग्रह है और भारत के संविधान के तहत दूसरे पद पर विराजमान व्यक्ति आपसे अनुरोध कर रहा है कि कृपया करके मुझे बताइए कि किसान से क्या वादा किया गया था। और जो वादा किया गया, वह क्यों नहीं निभाया गया।’
यह सवाल किसान आंदोलन और उनकी मांगों, खासकर 2020-21 के कृषि कानूनों के विरोध के बाद किए वादों के बारे में पूछा गया था।
शिवराज सिंह चौहान चुप रहे, लेकिन पार्टी लीडरशिप और RSS को धनखड़ का ये रवैया अखर गया। उन्होंने धनखड़ को हिदायत दी कि दोबारा ऐसा हुआ तो इसे अनुशासनहीनता समझा जाएगा। हालांकि शिवराज सिंह चौहान ने सीधे धनखड़ से इस मुद्दे पर कभी बात नहीं की
जस्टिस यशवंत वर्मा के घर बड़ी संख्या में जले हुए नोटों के बंडल पाए गए थे। वर्मा के खिलाफ महाभियोग लाया जाना था। इस पर लोकसभा के 150 सांसदों ने साइन किए हैं। कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने हस्ताक्षर प्रस्ताव लोकसभा सदस्यों को सौंपे जाने की सूचना भी दे दी थी।
बावजूद इसके धनखड़ ने राज्यसभा में जस्टिस वर्मा के खिलाफ 63 सांसदों के साइन इकट्ठे किए। ये सभी सांसद विपक्ष के थे। सवाल उठा कि लोकसभा में सत्ता पक्ष के 150 सांसदों ने महाभियोग को लेकर साइन कर दिए थे, तो राज्यसभा में 63 सांसदों के साइन का क्या मतलब है।
धनखड़ को पता था कि लोकसभा में महाभियोग लाने के लिए जरूरी संख्या पूरी हो चुकी है। दरअसल, वे अपने सदन में महाभियोग लाना चाहते थे। सोर्स बताते हैं कि धनखड़ के इस रवैये पर कानून मंत्री ने नाराजगी जताई।
मानसून सत्र के पहले दिन यानी 21 जुलाई को ऑपरेशन सिंदूर पर लोकसभा-राज्यसभा दोनों जगह विपक्ष चर्चा करवाना चाहता था। लोकसभा में राहुल गांधी ने बोलना शुरू किया, तो लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने उनसे कहा कि इस मुद्दे पर कब, कितने घंटे चर्चा होनी है, ये बिजनेस एडवाइजरी कमेटी में तय हो जाएगा। आप भी उस कमेटी का हिस्सा हैं, अपनी बात वहां रख सकते हैं।
इतना कहकर लोकसभा अध्यक्ष ने राहुल गांधी को बैठा दिया। उधर, राज्यसभा में कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को बोलने की इजाजत मिली। ये इजाजत सदन में चर्चा के नियम को लेकर बोलने के लिए मिली थी।
खड़गे बोलने के लिए खड़े हुए तो वे सिर्फ नियम के बारे में न बोलकर भाषण देने लगे। जेपी नड्डा ने एतराज किया। उन्होंने धनखड़ से कहा- सभापति महोदय, आपने तो इनसे बस नियम के बारे में बोलने के लिए कहा था, ये स्पीच दे रहे हैं। लोकसभा अध्यक्ष ने जिस तरह राहुल गांधी को बोलने से रोका था, वैसे धनखड़ ने मल्लिकार्जुन खड़गे को नहीं रोका। इससे साफ हो गया कि सरकार और धनखड़ के बीच कुछ ठीक नहीं है।
जेपी नड्डा ने ये तक कह दिया कि सिर्फ मेरी बात ही रिकॉर्ड पर जाएगी। सूत्रों के मुताबिक जेपी नड्डा और धनखड़ में खड़गे को बोलने की अनुमति देने और न रोकने को लेकर बहस हुई थी। सोर्स बताते हैं कि सदन की कार्यवाही खत्म होने के बाद धनखड़ के इस रवैये की जानकारी गृह मंत्री को दी गई।
इसके अलावा PAC की मीटिंग में तय नहीं हो पाया कि ऑपरेशन सिंदूर पर बैठक कब शुरू होगी। इसके बाद दूसरी बैठक बुलाई गई, लेकिन इस बैठक में जेपी नड्डा और मंत्री किरेन रिजिजू नहीं पहुंचे। सोर्स बताते हैं कि धनखड़ को इसकी जानकारी नहीं थी। हालांकि नड्डा ने सफाई दी कि धनखड़ के ऑफिस में मौजूद न रहने की सूचना दे दी गई थी।
नड्डा और रिजिजू के न आने से मीटिंग रद्द कर दी गई। साफ हो गया कि सरकार उपराष्ट्रपति धनखड़ के रवैये से नाराज है। सोर्स बताते हैं कि इसके बाद गृह मंत्री ने धनखड़ को सख्त संदेश दे दिया।


