राजस्थान का सबसे बड़ा सरकारी मेडिकल कॉलेज, सवाई मानसिंह (एसएमएस) में नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC ) के नियमों को दरकिनार करते हुए ट्रॉपिकल मेडिसिन डिपार्टमेंट चलाया जा रहा है। आरोप है कि यहां डिपार्टमेंट के प्रोफेसर को दरकिनार कर पढ़ाई, एग्जाम और थीसिस करवाई जा रही है।
डिपार्टमेंट और उसके एडमिनिस्ट्रेशन स्ट्रक्चर को NMC और मेडिकल यूनिवर्सिटी आरयूएचएस से क्लीयरेंस मिली हुई है। फिर भी, फैकल्टी और स्टूडेंट्स इसका विरोध कर रहे हैं। पिछले महीने एसएमएस मेडिकल कॉलेज में ट्रॉपिकल मेडिसिन डिपार्टमेंट में पीजी फाइनल और दूसरे सेमेस्टर के प्रैक्टिकल एग्जाम करवाए गए।
इन एग्जाम के लिए यूनिवर्सिटी की तरफ से बाहर के एग्जामिनर (परीक्षक) नियुक्त किए गए थे। लेकिन जब मेडिकल कॉलेज प्रशासन से एग्जामिनर का पैनल मांगा गया, तो प्रशासन ने ट्रॉपिकल मेडिसिन डिपार्टमेंट की फैकल्टी को दरकिनार करते हुए जनरल मेडिसिन डिपार्टमेंट के प्रोफेसर को एग्जामिनर के तौर पर नामित कर दिया।
एनएमसी की गाइडलाइन को केवल एग्जाम तक ही दरकिनार नहीं किया गया, बल्कि एग्जाम के बाद स्टूडेंट्स को थीसिस समेत अन्य काम के लिए ट्रॉपिकल डिपार्टमेंट के बजाय जनरल मेडिसिन के प्रोफेसर को गाइड के तौर पर नियुक्त कर दिया गया। एसएमएस मेडिकल कॉलेज की प्रिंसिपल और अतिरिक्त प्रिंसिपल का कहना है कि ट्रॉपिकल डिपार्टमेंट में जो प्रोफेसर नियुक्त हैं, वे एनएमसी की गाइडलाइन के मुताबिक योग्य ही नहीं हैं।
तीन साल का अनुभव नहीं, इसलिए नहीं बन सकते थे एग्जामिनर एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. दीपक माहेश्वरी और अतिरिक्त प्रिंसिपल (प्रशासन) डॉ. मोनिका जैन के अनुसार, ट्रॉपिकल मेडिसिन डिपार्टमेंट में वर्तमान में जो दोनों प्रोफेसर (डॉ. दिनेश जैन और डॉ. मनीष बंसल) नियुक्त हैं, वे एनएमसी के नियमों के मुताबिक एग्जामिनर और थीसिस के लिए गाइड बनने के योग्य नहीं हैं।
दोनों ही माइक्रोबायोलॉजी डिपार्टमेंट से आए हैं, जिनको 3 साल का क्लिनिकल अनुभव नहीं है। जब तक क्लिनिकल अनुभव नहीं होगा, उन्हें एग्जामिनर और गाइड नहीं बनाया जा सकता। इस कारण जनरल मेडिसिन से डॉ. पीडी मीणा को एग्जामिनर और गाइड बनाया गया है।

