ईद मिलने मिलाने का त्यौहार है सबको मिलना चाहिए।
सुरेश पचौरी भी पहुंच गए गुलाम नबी आजाद के पास।
शायद कह रहे हैं कि मैं तो बीजेपी में चला गया आप क्यों नहीं आ रहे?
आजाद शायद कह रहे हैं कि मुझे ले कहां रहे!
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ईद मिलने मिलाने का त्यौहार है सबको मिलना चाहिए।
सुरेश पचौरी भी पहुंच गए गुलाम नबी आजाद के पास।
शायद कह रहे हैं कि मैं तो बीजेपी में चला गया आप क्यों नहीं आ रहे?
आजाद शायद कह रहे हैं कि मुझे ले कहां रहे!
वह धर्म, राजनीति, अपराध, खेल, विज्ञान, तकनीक, मनोरजन, स्वास्थ्य या अन्य महत्वपूर्ण घटनाएँ हों, नवीनतम अपडेट्स और तथ्यपूर्ण रिपोर्ट्स प्रदान करते हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं,
मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए।
मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही,
हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए।
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