राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने कहा- लव जिहाद और धर्मांतरण राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक सद्भाव के लिए एक गंभीर खतरा है।
आंबेकर ने जोधपुर के लालसागर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की तीन दिवसीय अखिल भारतीय समन्वय बैठक के आखिरी दिन रविवार को मीडिया से ये बातें कहीं। उन्होंने कहा कि संघ का मानना है कि समाज के सभी वर्गों को एकजुट होकर इस समस्या का सामना करना होगा, क्योंकि धर्मांतरण के खिलाफ यह संघर्ष न केवल हिंदू धर्म की रक्षा का मामला है, बल्कि भारतीय संस्कृति और राष्ट्रीय अस्मिता को बचाने का भी प्रश्न है।
सुनील आंबेकर ने कहा कि जनजातीय और वनवासी क्षेत्रों में धर्मांतरण की समस्या अधिक गंभीर रूप धारण कर रही है। वनवासी कल्याण आश्रम जैसे संगठनों द्वारा जनजातीय क्षेत्रों में छात्रावास और अधिकार संबंधी कार्यों के बावजूद भी स्थिति चिंताजनक है। आंबेकर ने कहा कि “वनवासी कल्याण आश्रम संगठन ने जनजाति क्षेत्र में छात्रावास विशेषकर वनवासियों के जो जनजाति लोगों के अधिकार हैं, उसके संदर्भ में भी लगातार पहल की है।”
धर्मांतरण की समस्या से निपटने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और उससे जुड़े संगठनों की व्यापक रणनीति तैयार की गई है। संघ के स्वयंसेवक हिंदू समाज के साधु-संत और जागरूक व्यक्तियों के साथ मिलकर इस समस्या पर काम कर रहे हैं।
आंबेकर ने बताया- जो धर्म परिवर्तन जबरदस्ती से लालच से या भ्रमित करते हुए किया जाता है, वह सदा ही अनुचित है। इसको उजागर करने के लिए जगह-जगह साधु, संत और हिंदू समाज के बहुत सारे जागरूक लोग लगे हुए हैं।
विश्व हिंदू परिषद और अन्य संगठनों द्वारा व्यापक स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। समाज के उन लोगों तक पहुंचने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। आंबेकर ने कहा- समाज में कोई भी व्यक्ति ऐसा न छूटे। वह चाहे किसी भी जाति का हो, जनजाति का हो, गरीब हो, कहीं सुदूर रहता हो, वहां तक यह बात पहुंचे। इसके लिए सभी लोग प्रयास कर रहे हैं।विभिन्न संगठनों द्वारा लीगल तरीके से कई सारे मामले दर्ज कराए गए हैं। धर्मांतरण के मामलों को उजागर (एक्सपोज) करने और न्यायालयों में ले जाने का काम निरंतर किया जा रहा है। सेवा भारती और अन्य संगठन सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों की सहायता करके धर्मांतरण रोकने का काम कर रहे हैं
आंबेकर ने बताया कि विजयादशमी के अवसर पर देशभर में बड़े पैमाने पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। 2 अक्टूबर से विजयादशमी से यह शताब्दी वर्ष आरंभ होगा। सामान्यतः उसके आगे पीछे 7 दिनों तक जगह जगह पर अपनी-अपनी शाखा के स्तर पर, अपने जिला स्तर पर और नगर स्तर पर अपनी-अपनी योजना के अनुसार सभी स्वयंसेवक बड़ी संख्या में गणवेश में विजयादशमी का उत्सव मनाएंगे।
RSS प्रचार प्रमुख ने धर्मांतरण को केवल धार्मिक मुद्दा न मानकर राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सद्भावना के लिए गंभीर चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि यह एक लंबा रास्ता है, परंतु निश्चित रूप से यह आशा और विश्वास है कि जल्द ही वैसी अनुकूल परिस्थिति बनेंगी। संघ का मानना है कि समाज के सभी वर्गों को एकजुट होकर इस समस्या से निपटना होगा। धर्मांतरण के खिलाफ यह संघर्ष न केवल हिंदू धर्म की रक्षा का मामला है बल्कि भारतीय संस्कृति और राष्ट्रीय अस्मिता को बचाने का प्रश्न है।


