(राजीव सिंहल )
राहुल गांधी अभी भी पार्टी में बचकनापन दिखा रहे
————————————————————-
राहुल गांधी कब दोस्त और दुश्मन का फ़र्क़ समझेंगे
ये तो तय हे की कांग्रेस के कुछ नेता राहुल गांधी को भ्रमित कर कुछ ऐसा कर जाते हे की जिससे पार्टी को नुकसान पहुंचे
अब देखिए बिहार में कांग्रेस का जनाधार खत्म हुए अर्सा हो गया हे लेकिन वहाँ के कांग्रेस के नेता अभी भी एक दूसरे को निबटाने में लगे हुए हे ।बिहार में अभी पप्पू यादव और कन्हैया कुमार कांग्रेस की और से भाजपा के ख़िलाफ़ मोर्चा खोले हुए हे, दोनों भाजपा पर प्रहार करने का कोई मौका नहीं छोड़ते ।अभी विपक्ष के एक विरोध प्रदशन के लिए राहुल गांधी पटना पहुंचे तो उनके साथ वेन में चढ़ने से कन्हैया कुमार और पप्पू यादव को रोक दिया गया ।
ये किसके कहने पर या किसके इशारे पर हुआ ये तो कांग्रेस का अंदरूनी विषय हो सकता ही लेकिन विपक्ष को बैठे बिठाए राहुल गांधी पर निशाना साधने का मोका मिल गया
वो तो भला हो पप्पू यादव का जिन्होंने खुद इस घटना को “अपमान” मानने से इनकार किया है और कहा कि उन्हेंचोट लग गई थी। उन्होंने यह भी कहा कि सार्वजनिक हित से बढ़कर कुछ नहीं है और वह लोगों के लिए ऐसाअपमान सहने को तैयार हैं।
लेकिन राहुल गांधी को अब दोस्त और दुश्मन का फर्क समझ लेना चाहिए
बिहार में कांग्रेस बड़त ले सकती ही पर ?
——————————————————
बिहार में कांग्रेस आगामी विधान सभा चुनाव में बड़त ले सकती हे लेकिन राहुल गांधी का राजद पर अंधविश्वास ऐसा नहीं होने देगा ।
सबको पता हे लोकसभा चुनाव में लालू और तेजस्वी यादव ने ऐसा माहौल बनाया की उनके नेतृत्व में इंडिया गठबंधन को भारी बहुमत मिलेगा और नीतीश का सफाया हो जाएगा
उन्होंने राहुल गांधी को ऐसी पट्टी पड़ायी की पप्पू यादव को निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में लालू यादव परिवार की अदावत के कारण चुनाव लड़ना पड़ा और वो जीते भी
लोकसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन की करारी हार हुई और उसे 9 सीट ही मिली , जबकि उसे 20 और अधिक सीट मिल सकती थी
अभी भी यादव परिवार ऐसा ही माहौल बना रहा हे, उन्होंने बिहार के कुछ कांग्रेस नेताओं के आगे चुग्गा डाल दिया गया की अगर वो सत्ता में आयेंगे तो उन्हें भी मौका मिलेगा बशर्ते वो उनके हिसाब से टिकट वितरण करे
देखना यही हे की क्या राहुल गांधी अपने जनाधार वाले नेताओ पर भरोसा करेंगे या फिर वो पुरानी कहानी ही दोहरायेंगे
वसुंधरा के आने की अटकलों से माहौल गरमाया
———————————————————-
क्या वसुंधरा राजे राजस्थान की मुख्यमंत्री बन रही है ये सवाल राज्य के राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है ।
अभी में राज्यो के कई भागो में गया सब जगह यही सुनने को मिला की वसुंधरा को वापस कमान मिलने जा रही हे
असल में मुख्यमंत्री भजनलाल के बारे में ये मिथ बन गया हे की उनकी प्रशासन पर पकड़ कमजोर हे और नोकरशाही हावी है ,जनप्रतिनिधि पंगु बन गए हे और जनता के काम नहीं हो रहे हे ।
वो अभी भी दिल्ली के निर्देशों से ही अपनी सरकार चला रहे हे , राज्य के 2 भाजपा नेता उनके काबू में नहीं ही और वो उन पर लगाम लगाने में असफल रहे हे
भाजपा आलाकमान के कुछ नेता वसुंधरा के संपर्क में हे, और वो उन्हें आश्वस्त कर रहे है की इन हालातो में पार्टी के पास भजनलाल को 30 महीने के बाद हटाने के अलावा कोई चारा नहीं बचेगा
वैसे अभी भी वसुंधरा राजे का रुतबा वैसे ही बरकरार हे जैसे वो मुख्यमंत्री थी तब था ,उनकी कही बाते अब भी हलचल मचाती हे और सुर्खियां बनती हे ।
गहलोत को लेकर कांग्रेस असमंजस में
—————————————————
अशोक गहलोत पिछले कई दिनों से भाजपा को लेकर जिस तरह बयानबाजी कर रहे हे उससे कांग्रेस के नेता हतप्रभ हे की गहलोत ऐसी बयानबाजी से पार्टी का भला कर रहे हे या नुकसान
स्तिथि ये हो गई ही अब तो गहलोत के विश्वासपात्र भी उनके बयानों को लेकर किनारा करने लगे हे और उन्हें उनके निजी बयान बता रहे हे
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र शेखावत की बात हो या मुख्यमंत्री को लेकर दिया बयान की वो 5 साल राज करेंगे कांग्रेसियों को हज़म नहीं हो रहा हे ,उन्हें लग रहा हे गहलोत फ़ोन टेपिंग कांड में उनके पुराने ओ एस डी लोकेश शर्मा के पलट जाने से उनकी बड़ती मुश्किलों के कारण राज्य की राजनीति से दूर जाना नहीं चाहते इसलिए गहलोत ये सब कर रहे हे ।
कांग्रेस के नेताओ को लग रहा हे की गहलोत पिछले चुनाव से पहले वाला माइंड गेम खेल रहे हे जब उन्होंने सचिन पायलेट को सत्ता में आने से रोकने के लिए अपने बयानों से अपनी ही सत्ता गँवा दी थी ।
गहलोत को अब कांग्रेस हाईकमान दिल्ली बुलाकर संगठन का काम सौपना चाहता हे और अशोक गहलोत को लग रहा हे अगर वो दिल्ली चले गए तो सचिन पायलट राज्य में फिट हो जाएँगे ।
चलते चलते
——————-
एक पत्रकार ने एक राजनेता से पूछा: “सर, आप अपनी जीत का श्रेय किसे देंगे?”
राजनेता मुस्कुराते हुए बोले: “अपनी हार को, क्योंकि उसी ने मुझे सिखाया कि अगली बार क्या नहीं करना है!”

